पुराने औद्योगिक क्षेत्रों का पुनर्विकास अब समय की सबसे बड़ी जरूरत
देश के कई बड़े शहरों में आज एक गंभीर समस्या तेजी से सामने आ रही है। जिन औद्योगिक क्षेत्रों को 50-70 साल पहले शहरों से दूर बसाया गया था, वे अब शहरों के बीचों-बीच आ चुके हैं। कभी विकास का आधार माने जाने वाले ये औद्योगिक इलाके आज ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, बिजली-पानी की कमी, संकरी सड़कों और अव्यवस्थित इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी समस्याओं का कारण बनते जा रहे हैं। इन इलाकों की मौजूदा स्थिति न केवल उद्योगों के विकास में बाधा बन रही है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के जीवन और पर्यावरण पर भी नकारात्मक असर डाल रही है।
ऐसे में अब समय आ गया है कि सरकारें इस विषय को केवल स्थानीय समस्या न मानकर राष्ट्रीय स्तर की चुनौती के रूप में देखें और पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के पुनर्विकास के लिए दीर्घकालिक नीति तैयार करें।
पुराने औद्योगिक क्षेत्रों की पहचान और नई योजना
सबसे पहले स्थानीय विकास प्राधिकरणों, जैसे जयपुर में JDA या अन्य शहरों में अर्बन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट जैसी संस्थाओं को अधिकार दिए जाएं कि वे पुराने औद्योगिक क्षेत्रों की पहचान करें और उनके पुनर्विकास के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करें।
इन क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति, आने वाले 50 वर्षों की जरूरतों और शहरों के विस्तार को ध्यान में रखते हुए नई योजना बनाई जाए। पुराने उद्योगों को व्यवस्थित तरीके से शहरों के बाहर विकसित किए जाने वाले आधुनिक औद्योगिक पार्कों में स्थानांतरित किया जाए, ताकि उद्योगों को भविष्य के अनुरूप बेहतर वातावरण मिल सके।
आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए औद्योगिक पार्क
नए औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण केवल जमीन आवंटित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। वहां चौड़ी सड़कें, पर्याप्त बिजली-पानी, पार्किंग, सीवरेज सिस्टम और भारी वाहनों के लिए 24 घंटे सुगम प्रवेश जैसी सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
इसके साथ ही बड़े ट्रीटमेंट प्लांट, सौर ऊर्जा संयंत्र, बिजली सब-स्टेशन और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में पर्यावरणीय समस्याओं को कम किया जा सके और उद्योग आत्मनिर्भर बन सकें।
कामगारों के लिए आवासीय सुविधा भी जरूरी
औद्योगिक विकास केवल फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं होना चाहिए। वहां काम करने वाले मजदूरों और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए भी आवासीय सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए। EWS श्रेणी और प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत ऐसे आवास बनाए जा सकते हैं, जहां कामगार अपने कार्यस्थल के पास ही रह सकें।
इससे शहरों में रोजाना होने वाली ट्रैफिक समस्या कम होगी, लोगों का समय और पैसा बचेगा तथा उन्हें रोजगार और आवास दोनों एक ही स्थान पर मिल सकेंगे। इससे जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।
उद्योगपतियों को भी मिलना चाहिए उचित प्रोत्साहन
पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को खाली करवाने के लिए उद्योगपतियों को भरोसे और लाभ दोनों की आवश्यकता होगी। इसलिए उनकी वर्तमान जमीनों का उचित मूल्यांकन कर उन्हें नई जगह पर रियायती दरों पर प्लॉट उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
उदाहरण के तौर पर जयपुर में JDA जैसी संस्थाओं को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है कि वे पुराने औद्योगिक क्षेत्रों की जमीनों को एकत्रित करें, उनका व्यावसायिक उपयोग विकसित करें और वहां से प्राप्त राजस्व का उपयोग नए औद्योगिक क्षेत्रों के निर्माण और उद्योगपतियों को पुनर्वास देने में करें। इससे सरकार, उद्योग और आम जनता – तीनों को लाभ होगा।
समयबद्ध योजना से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था
यदि सरकार आज से ही इस दिशा में ठोस कदम उठाना शुरू करे, तो अगले 10 से 15 वर्षों में देशभर में बड़े स्तर पर औद्योगिक पुनर्विकास का कार्य किया जा सकता है। इससे न केवल लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा, बल्कि देश की जीडीपी में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।
निर्माण कार्य, नई इंडस्ट्री, रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और सेवा क्षेत्र में भी इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देगा।
जनप्रतिनिधियों और औद्योगिक संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण
इस विषय में केवल सरकार की पहल पर्याप्त नहीं होगी। सभी औद्योगिक संगठनों, व्यापार मंडलों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी आगे आकर भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सुझाव देने चाहिए। आने वाले 50 वर्षों की जरूरतों के अनुसार आज योजनाएं बनेंगी, तभी शहर व्यवस्थित और आधुनिक बन पाएंगे।
जयपुर मॉडल एक उदाहरण बन सकता है
मैं यहां जयपुर का उदाहरण देना चाहूंगा। वर्ष 2012-13 में तत्कालीन सरकार को सुझाव दिया गया था कि जालूपुरा और लाल कोठी स्थित पुराने MLA क्वार्टरों को हटाकर वहां की जमीन का व्यावसायिक उपयोग किया जाए। इन स्थानों पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स या अन्य आधुनिक परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं।
साथ ही विधानसभा के पास स्थित वर्तमान MLA क्वार्टरों की जगह बहुमंजिला आधुनिक आवासीय परिसर बनाए जाएं, जहां सभी विधायक एक ही स्थान पर बेहतर सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था के साथ रह सकें। इससे उनकी सुरक्षा व्यवस्था भी आसान होगी और शहर में यातायात का दबाव भी कम होगा। यानी इससे आम जनता और जनप्रतिनिधि – दोनों को फायदा मिलेगा।
राष्ट्र निर्माण की दिशा में बड़ा कदम
पुराने औद्योगिक क्षेत्रों का पुनर्विकास केवल शहरी विकास का विषय नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। यदि सही योजना, आधुनिक सोच और राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ इस दिशा में कार्य किया जाए, तो भारत के शहर अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित, आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बन सकते हैं।
सरकार, औद्योगिक संस्थाओं और समाज को मिलकर इस दिशा में गंभीरता से काम करना होगा। यही आने वाले भारत के मजबूत और सुनियोजित विकास की नींव बन सकता है।
रोटेरियन सुनील दत्त गोयल
महानिदेशक, इम्पीरियल चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री,
एडवाइजर, एडिटर्स क्लब ऑफ़ इंडिया,
पूर्व उपाध्यक्ष, जयपुर स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड, जयपुर, राजस्थान
मेंबर, रोटरी क्लब जयपुर सिटीजन, (RID3056)
suneelduttgoyal@gmail.com


















