देशभक्ति · भारत के राष्ट्रीय प्रतीक और संगठन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)

1925 में नागपुर में स्थापित इस संगठन का परिचय, इसकी दृष्टि, इसकी संरचना और इसका सेवा-कार्य — rss.org पर प्रकाशित संघ की अपनी सामग्री के आधार पर।

इस पृष्ठ के स्रोत के बारे में

इस अनुभाग के अन्य तीन पृष्ठ — राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय प्रतीक, और राष्ट्रगान/राष्ट्रगीत — भारत सरकार के संविधान, अधिनियमों और आदेशों पर आधारित हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक स्वतंत्र, स्वयंसेवी सामाजिक संगठन है, भारत सरकार का अंग नहीं — इसलिए यह पृष्ठ “भारत सरकार द्वारा सत्यापित” नहीं कहा जा सकता। यहाँ दी गई जानकारी संघ की अपनी आधिकारिक वेबसाइट (rss.org, विशेषकर इसके हिंदी संस्करण) से ली गई है, तथा स्थापना-तिथि एवं सरसंघचालकों के उत्तराधिकार-क्रम जैसे निर्विवाद तथ्यों की पुष्टि स्वतंत्र संदर्भ-स्रोतों से भी की गई है। इस पृष्ठ में संघ के इतिहास के उन विवादास्पद प्रसंगों (जैसे संघ पर लगे प्रतिबंध) को सम्मिलित नहीं किया गया है — यह एक सजग निर्णय है, विवरण की कमी नहीं। पूरी सूची नीचे “संदर्भ” अनुभाग में दी गई है।

  • स्थापना27 सितम्बर 1925, विजयादशमी
  • स्थाननागपुर, महाराष्ट्र
  • संस्थापकडॉ. केशव बलिराम हेडगेवार
  • वर्तमान सरसंघचालकडॉ. मोहन भागवत (छठे)
  • शाखाएँ88,949 (मार्च 2026)
  • मुख्यालयडॉ. हेडगेवार भवन, महाल, नागपुर 440032

यह एक रिकॉर्डिंग है, सुविधा के लिए यहाँ दी गई है। इसके अर्थ व भावार्थ नीचे “संघ प्रार्थना” अनुभाग में दिए गए हैं।

संघ के अपने शब्दों में

“इस आवश्यकता को पूरा करनेवाला जो स्वयंस्फूर्त व्यक्ति होता है वही स्वयंसेवक होता है, और ऐसे स्वयंसेवकों की संगठित शक्ति ही इस आवश्यकता को पूर्ण करेगी, ऐसा संघ का विश्वास है।”

स्रोत

rss.org के हिंदी पृष्ठ “दृष्टि और दर्शन” से उद्धृत।

संघ प्रार्थना

शाखा के प्रतिदिन के कार्यक्रम के अंत में स्वयंसेवक सामूहिक रूप से जो प्रार्थना करते हैं, उसे “संघ प्रार्थना” कहा जाता है (संस्कृत में, अंतिम पंक्ति को छोड़कर)। यह डॉ. हेडगेवार और श्री गुरुजी (गोलवलकर) के मार्गदर्शन में संस्कृत के प्राध्यापक श्री नरहरि नारायण भिडे द्वारा 1940 में नागपुर में रची गई थी, और उसी वर्ष श्री यादवराव जोशी द्वारा पहली बार गाई गई। यह संघ के प्रत्येक कार्यक्रम में अनिवार्य रूप से गाई जाती है, और इसके अंत में “भारत माता की जय” का उद्घोष होता है।

अर्थ एवं भावार्थ

प्रार्थना का आरंभ मातृभूमि के प्रति एक प्रणाम से होता है — उसे “सदा वत्सले” अर्थात् सदैव अपनी संतान पर स्नेह करनेवाली माता के रूप में सम्बोधित करते हुए। इसके बाद के भाग में भारत की भौगोलिक विशालता (पर्वत, नदियाँ, सागर-तट) और उसकी सांस्कृतिक-आध्यात्मिक परंपरा का स्मरण किया जाता है — यह भूमि केवल भौतिक भूखंड नहीं, बल्कि ऋषियों, वीरों और महापुरुषों की तपोभूमि है, ऐसा भाव व्यक्त होता है।

मध्य भाग में स्वयंसेवक अपनी ओर से एक व्यक्तिगत संकल्प लेता है — कि वह अपना तन, मन और धन मातृभूमि व समाज की सेवा में अर्पित करेगा, और चरित्र, अनुशासन व साहस के गुण अपने में विकसित करेगा। अंत में ईश्वर से यह प्रार्थना की जाती है कि स्वयंसेवकों की यह संगठित शक्ति निरंतर बढ़े, ताकि वह समाज तथा राष्ट्र के उत्थान में समर्थ हो सके। प्रार्थना के समापन पर सब मिलकर “भारत माता की जय” का उद्घोष करते हैं।

कुछ प्रमुख शब्द और उनका अर्थ

शब्दसरल अर्थ
मातृभूमिमातृभूमि, जन्मभूमि — वह भूमि जिसे माता के समान माना जाता है
वत्सलसंतान के प्रति सहज, गहरा स्नेह रखनेवाला
स्वयंसेवकअपनी इच्छा से, बिना किसी दबाव के सेवा-कार्य में जुड़ा व्यक्ति
संघटन / संगठनअनेक व्यक्तियों का एक उद्देश्य के लिए सुव्यवस्थित रूप से जुड़ना
राष्ट्रोत्कर्षराष्ट्र का उत्थान, उन्नति
तनु-मनसा-धनेनशरीर, मन और धन के द्वारा (अर्थात् सर्वस्व सहित)

यह एक सामान्य शब्दकोश है, प्रार्थना की पंक्तियों का क्रमबद्ध अनुवाद नहीं — ऊपर बताए गए कारण से पूरे मूल बोल यहाँ पुनः प्रकाशित नहीं किए गए हैं।

पूरे बोल यहाँ क्यों नहीं दिए गए

प्रार्थना के मूल रचयिता (श्री नरहरि नारायण भिडे, 1940) के निधन-वर्ष की पुष्टि नहीं मिल पाई, इसलिए यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि यह रचना सार्वजनिक प्रताधिकार-मुक्त (public domain) है या नहीं — ठीक उलट, जन-गण-मन और वन्देमातरम् के मामले में यह बात निश्चित है (दोनों रचनाकारों का निधन दशकों पहले हुआ, और भारत सरकार स्वयं दोनों के पाठ आधिकारिक रूप से प्रकाशित करती है)। इसलिए, यहाँ केवल भावार्थ और ऊपर दी गई रिकॉर्डिंग दी गई है; पूरे मूल बोल के लिए ऊपर की रिकॉर्डिंग सुनें।

स्थापना और संस्थापक

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में 1925 में की। संघ के अपने प्रकाशित “सामान्य प्रश्न” (FAQ) पृष्ठ के अनुसार: “संघ के संस्थापक हैं डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार। डॉ. जी स्वातंत्र्य सेनानी थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा में ही समर्पित किया था। उन्होंने नागपुर में, 1925 में संघ प्रारंभ किया।” स्थापना की ठीक तिथि — 27 सितम्बर 1925, विजयादशमी के दिन — स्वतंत्र ऐतिहासिक स्रोतों से ली गई है, क्योंकि संघ के अपने हिंदी पृष्ठों पर यह दिनांक इस रूप में नहीं दिया गया मिला।

डॉ. हेडगेवार ने संघ के प्रथम सरसंघचालक के रूप में कार्य किया। 21 जून 1940 को उनका देहावसान हुआ। इसके बाद 3 जुलाई 1940 को श्री माधव सदाशिव गोलवलकर (“श्री गुरुजी”) को द्वितीय सरसंघचालक घोषित किया गया — यह तिथियाँ संघ के अपने हिंदी “घटनाक्रम” पृष्ठ से ली गई हैं।

दृष्टि एवं ध्येय

संघ अपने “दृष्टि और दर्शन” पृष्ठ पर अपने उद्देश्य को इस प्रकार रखता है: समाज को अपनी प्राचीन परंपरा के मूल्यों पर, किन्तु युग के अनुकूल ढंग से, पुनः सुसंगठित और सुदृढ़ बनाना — ताकि वह “समर्थ, सुप्रतिष्ठित, सद्धर्माधिष्ठित” बन सके। संघ के शब्दों में, यह कार्य किसी एक-दो व्यक्ति के प्रयास से नहीं, बल्कि संगठित स्वयंसेवकों की सामूहिक शक्ति से ही संभव है।

शाखा — दैनिक इकाई

संघ की मूल इकाई शाखा है। संघ के अपने FAQ पृष्ठ के अनुसार: “किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र के स्वयंसेवकों के एक घण्टे के प्रतिदिन मिलन को शाखा कहते हैं।” प्रतिदिन की इस एक घण्टे की शाखा में “विविध शारीरिक व्यायाम, खेल, देशभक्ति गीत, विविध राष्ट्र हित के विषयों पर चर्चा तथा भाषण और मातृभूमि की प्रार्थना होती है।” संघ के “स्वयंसेवक” पृष्ठ के अनुसार, शाखा के अंत में स्वयंसेवक अपने भगवा ध्वज को सामूहिक रूप से नमन करते हैं और सामूहिक प्रार्थना करते हैं।

गणवेश केवल विशेष अवसरों पर पहना जाता है, नित्य की शाखा के लिए अनिवार्य नहीं है, और प्रत्येक स्वयंसेवक अपने खर्चे से इसकी व्यवस्था करता है — यह भी संघ के अपने FAQ में स्पष्ट किया गया है। सदस्यता की कोई औपचारिक प्रक्रिया, शुल्क या पंजीकरण नहीं है; कोई भी व्यक्ति निकट की शाखा में जाकर सम्मिलित हो सकता है।

सदस्यता — स्वयंसेवक कौन बन सकता है

संघ के अपने FAQ पृष्ठ के अनुसार, “कोई भी हिंदू पुरूष संघ का सदस्य बन सकता है।” संघ यह भी स्पष्ट करता है कि यहाँ “हिंदू” शब्द का प्रयोग उपासना-पद्धति या मजहब के अर्थ में नहीं, बल्कि एक जीवन-दृष्टि (“विविधता में एकता”) के अर्थ में होता है, और इस जीवन-दृष्टि को माननेवाले किसी भी मजहब या उपासना-पंथ के व्यक्ति — जिनमें भारत में रहनेवाले ईसाई और मुस्लिम भी शामिल हैं — संघ में सम्मिलित हो सकते हैं, बिना किसी भेदभाव के। महिलाएँ इसी विचारधारा वाले पृथक् संगठन, राष्ट्र सेविका समिति, के माध्यम से जुड़ती हैं — यह उल्लेख संघ के अंग्रेज़ी FAQ में मिलता है।

स्रोत

rss.org/hindi — सामान्य प्रश्न, 4 जून 2017; राष्ट्र सेविका समिति संबंधी विवरण rss.org — Basic FAQ on RSS (अंग्रेज़ी) से।

सरसंघचालकों की परंपरा

1925 से अब तक संघ में छह सरसंघचालक हुए हैं:

  • डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार — 1925–1940 (संस्थापक; निधन 21 जून 1940)
  • माधव सदाशिव गोलवलकर, “श्री गुरुजी” — 3 जुलाई 1940 – 5 जून 1973
  • मधुकर दत्तात्रय देवरस, “बालासाहब देवरस” — 6 जून 1973 – 11 मार्च 1994
  • राजेंद्र सिंह, “रज्जू भैया” — 11 मार्च 1994 – 10 मार्च 2000
  • के. एस. सुदर्शन — 10 मार्च 2000 – 21 मार्च 2009
  • डॉ. मोहन भागवत — 21 मार्च 2009 से अब तक (वर्तमान, छठे सरसंघचालक)
स्रोत

पहले चार परिवर्तनों की तिथियाँ rss.org/hindi — घटनाक्रम से सीधे ली गई हैं। डॉ. मोहन भागवत के सरसंघचालक बनने की तिथि (21 मार्च 2009) स्वतंत्र स्रोत से जाँची गई है, क्योंकि यह घटना संघ के इस हिंदी पृष्ठ की समय-सीमा (2007 तक) के बाद की है — देखें List of leaders of the Rashtriya Swayamsevak Sangh (Wikipedia)।

सेवा कार्य

संघ के अपने “घटनाक्रम” पृष्ठ पर आपदा-राहत और सामाजिक सेवा के अनेक दिनांकित उदाहरण दर्ज हैं। कुछ उदाहरण:

  • 1950 — असम में भूकंप और बाढ़ के बाद स्वयंसेवकों द्वारा राहत कार्य; विभाजन के बाद पाकिस्तान से आए शरणार्थियों की सहायता हेतु “वास्तुहारा सहायता समिति” का गठन।
  • 1987 — गुजरात के अकाल में, 18,000 में से 15,000 प्रभावित गाँवों में सहायता; 123 राहत केंद्रों में 1,45,310 गोवंश की रक्षा।
  • 2001 — 26 जनवरी को गुजरात भूकंप के बाद 35,000 से अधिक स्वयंसेवक राहत कार्यों में सक्रिय रहे।
  • 2004 — 26 दिसम्बर की सुनामी के कुछ ही घंटों बाद स्वयंसेवकों का राहत कार्य प्रारंभ हुआ।

वर्तमान सेवा-कार्य की सीमा, संघ की वार्षिक प्रतिवेदन (2025–26, समालखा) के अनुसार: 3,007 शहरों में 15,314 व्यवसाय-आधारित शाखाओं के माध्यम से 26,492 सेवा-स्वयंसेवक नियुक्त किए गए हैं, और 12,826 बस्तियों में प्रति दिन/सप्ताह 96,045 गतिविधियाँ चलती हैं — जिनमें 45,931 शैक्षणिक, 15,632 स्वास्थ्य-संबंधी, 17,888 सामाजिक और 55,958 अन्य प्रकार की गतिविधियाँ शामिल हैं।

स्रोत

ऐतिहासिक उदाहरण rss.org/hindi — घटनाक्रम से। वर्तमान आँकड़े अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, वार्षिक प्रतिवेदन 2025–26 (समालखा, 13 मार्च 2026) से।

संलग्न संगठन

संघ की प्रेरणा से समय-समय पर अनेक स्वतंत्र सामाजिक, शैक्षणिक और सेवा-क्षेत्र के संगठन खड़े हुए, जिन्हें सामान्यतः “संघ परिवार” कहा जाता है। संघ के अपने “घटनाक्रम” पृष्ठ पर दर्ज कुछ संगठन, उनकी स्थापना-तिथि सहित:

  • वनवासी कल्याण आश्रम — 1952, जशपुर
  • अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) — 1949 (ABVP के अपने प्रकाशन के अनुसार)
  • भारतीय मजदूर संघ — 1955
  • विश्व हिंदू परिषद — 1964
  • अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत — 1972
  • भारतीय किसान संघ — 1978
  • संस्कार भारती — 1981
  • राष्ट्रीय सिख संगत — 1986
  • अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद — 1992

संघ की वार्षिक प्रतिवेदन (2025–26) के अनुसार, वर्तमान में लगभग 32 ऐसे संगठनों के प्रतिनिधि अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में सम्मिलित होते हैं।

स्रोत

rss.org/hindi — घटनाक्रम; ABVP की स्थापना-तिथि abvp.org से; संगठनों की वर्तमान संख्या वार्षिक प्रतिवेदन 2025–26 से।

शताब्दी वर्ष (2025–26)

2 अक्तूबर 2025 (विजयादशमी) को संघ ने अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण किए। संघ की वार्षिक प्रतिवेदन (मार्च 2026) के अनुसार, शताब्दी वर्ष में देशभर में 62,555 विजयादशमी उत्सव आयोजित हुए, जिनमें 27.1 लाख युवा तथा 5,36,955 अन्य लोग सम्मिलित हुए; और गृह-संपर्क अभियान के अंतर्गत 3,89,465 गाँवों तथा 31,143 नगरीय क्षेत्रों में 10 करोड़ से अधिक घरों तक संपर्क किया गया।

संदर्भ (References)

इस पृष्ठ पर “भारत सरकार के संदर्भ” (Government References) शीर्षक जानबूझकर नहीं दिया गया है — राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत सरकार का अंग नहीं है, इसलिए इस अनुभाग के अन्य पृष्ठों की तरह यहाँ भारत सरकार के दस्तावेज़ों का हवाला नहीं दिया जा सकता। नीचे दो अलग सूचियाँ हैं — संघ के अपने प्रकाशन, और स्वतंत्र स्रोत जिनसे कुछ निर्विवाद तिथियों की जाँच की गई।

संघ के अपने प्रकाशन (rss.org)

  1. दृष्टि और दर्शनrss.org/hindi, 4 जून 2017।
  2. सामान्य प्रश्नrss.org/hindi, 4 जून 2017। (अंग्रेज़ी संस्करण: Basic FAQ on RSS)
  3. स्वयंसेवकrss.org/hindi, 4 जून 2017।
  4. घटनाक्रम (Timeline)rss.org/hindi — संस्थापन, सरसंघचालक-परंपरा और सेवा-कार्य के दिनांकित विवरण का स्रोत।
  5. अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, वार्षिक प्रतिवेदन 2025–26समालखा, हरियाणा, 13–15 मार्च 2026 — वर्तमान शाखा-संख्या, सेवा-कार्य और शताब्दी-वर्ष के आँकड़ों का स्रोत।

स्वतंत्र स्रोत (केवल निर्विवाद तथ्यों की जाँच हेतु)

  1. List of leaders of the Rashtriya Swayamsevak SanghWikipedia — डॉ. मोहन भागवत के सरसंघचालक बनने की तिथि (21 मार्च 2009) की पुष्टि हेतु।
  2. Since 1949abvp.org — अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की स्थापना-तिथि हेतु।

यह पृष्ठ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अपनी प्रकाशित सामग्री (rss.org) पर आधारित है और सार्वजनिक जानकारी हेतु प्रस्तुत है; यह संघ का आधिकारिक प्रकाशन नहीं है और उसका स्थान नहीं ले सकता। किसी भी अंतर की स्थिति में rss.org पर प्रकाशित मूल सामग्री ही मान्य होगी। इस पृष्ठ पर संघ के इतिहास के विवादास्पद राजनीतिक प्रसंग (जैसे संघ पर लगे प्रतिबंध) सम्मिलित नहीं किए गए हैं। स्रोत अंतिम बार 29 सितम्बर 2026 को जाँचे गए।

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