मैं आपका ध्यान भारत में बढ़ते साइबर फ्रॉड के मामलों को रोकने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझावों की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। कृपया नीचे दिए गए बिंदुओं पर विचार करें:

1. जारी सिम की पुनः केवाईसी: वर्तमान में कार्यरत सभी सिम कार्ड्स की पुनः केवाईसी की जाए और उन्हें आधार से प्रॉपर तरीके से लिंक किया जाए। भविष्य में जारी होने वाली सिम की भी आधार और अंगूठा निशानी से अवश्य पुष्टि की जाए।

2. सिम विक्रेताओं को दंड: यदि सिम विक्रेता कोई गलती करता है, तो उसकी सिम बेचने की एजेंसी समाप्त कर दी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में वह किसी अन्य कंपनी की सिम से संबंधित व्यापार न करे।

3. फ्रॉड सिम का स्थायी रूप से ब्लॉक: जो सिम साइबर क्राइम के फ्रॉड में शामिल पाई जाती है, उनसे संबंधित आधार कार्ड से जितनी भी सिम इशू की गई हैं, उन सभी को स्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया जाए और उस आधार कार्ड के व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि आधार कार्ड से अगले कुछ सालों तक किसी भी प्रकार की सिम या ईमेल आईडी जेनरेट न हो। यह उसके लिए प्रारंभिक दंड प्रावधान होना चाहिए।

4. बैंक खातों की पुनः केवाईसी: आरबीआई को चाहिए कि वह पूरे हिंदुस्तान में सभी बैंकों में री-केवाईसी सुनिश्चित करे और उनके लेटेस्ट एड्रेस को पूर्णतया अपडेट करे। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि बचत खाताधारक क्या व्यवसाय / व्यापार कर रहा है और उसकी सालाना आमदनी कितनी है। 12 महीने का ब्रेकअप करके उस पर कैप लिमिट फिक्स की जाए। यदि वह उससे ज्यादा पैसा जमा करता है या निकालता है, तो उसे 48-72 घंटे के लिए होल्ड कर दिया जाए और बैंक अधिकारी खाता धारक से पूछे कि अचानक इतना बड़ा पैसा कहां से आया और कहां जा रहा है। तब तक के लिए पैसों को सेल्फ / नकद में निकालने की अनुमति को बंद किया जाए।

5. आधार-लिंक्ड खातों का मर्जिंग: जिस आधार कार्ड के आधार पर खाता खोला गया है, उसके पूरे भारत में जितने भी खाते खुले हैं, उन्हें मर्ज किया जाए जिससे पता चले कि इस आधार कार्ड से कितने खाते खुले हुए हैं। किसी एक खाते में गड़बड़ी पकड़ में आने पर उसके सभी खाते फ्रीज कर दिए जाएं और अगले कुछ वर्षों के लिए उसकी बैंकिंग सुविधा बंद कर दी जाए। उसे दंड के रूप में नया खाता खोलने की अनुमति न हो और आधार कार्ड को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाए। अपने खातों का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति को दिए जाने व फर्जी खाते बेचे जाने की समस्या भी इससे रुक जाएगी।

6. पीओ एस मशीन की पुनः केवाईसी: जितनी भी पीओएस मशीन बैंकों ने जारी की हैं, उनकी दोबारा केवाईसी और भौतिक सत्यापन कराया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि जिस व्यक्ति को पीओएस मशीन दी जा रही है, उसे वास्तव में इसकी आवश्यकता है। पीओएस मशीन को सेविंग खाते से जोड़ना बंद किया जाए और केवल करंट अकाउंट से जोड़ा जाए।

7. अस्थायी बैंक कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई: बैंकों के निचले स्तर के कर्मचारी जो टेम्परेरी या कम समय के लिए नौकरियां करते हैं और टारगेट पूरा करने के लिए गलत काम करते हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।

8. साइबर फ्रॉड में शामिल बैंक कर्मचारियों को दंड: यदि किसी भी बैंक का कर्मचारी किसी भी साइबर फ्रॉड में शामिल पाया जाता है, तो उसे इतना दंडित किया जाए कि वह अगले दो-चार-पांच साल तक किसी भी बैंक या वित्तीय संस्थान में कार्य न कर सके।

यदि इन सभी सुझावों को प्रभावी रूप से लागू किया जाता है, तो हमारे देश में साइबर फ्रॉड के मामलों में काफी कमी आएगी।

धन्यवाद,

सुनील दत्त गोयल
महानिदेशक
इम्पीरियल चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
जयपुर, राजस्थान

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