भारतीय त्योहारों के पंचांग और छुट्टियों में विरोधाभास : समाधान की दिशा में एक पहल

भारत विविधताओं का देश है, जहाँ सनातन संस्कृति के अंतर्गत अनेकों त्योहार और पर्व मनाए जाते हैं। इन त्योहारों का उद्देश्य न केवल धार्मिक आस्था को व्यक्त करना होता है, बल्कि यह परिवार और समाज को जोड़ने, मानसिक शांति प्राप्त करने और राष्ट्रीय एकता को सशक्त करने का भी माध्यम हैं।
परंतु पिछले कुछ वर्षों में एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है। अलग-अलग ब्राह्मण समाजों, मंदिर समितियों और धार्मिक संस्थानों द्वारा त्योहारों की तिथियों में विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक ही त्योहार को अलग-अलग राज्यों और समुदायों में अलग-अलग दिन मनाया जा रहा है। इसका सीधा असर आम नागरिकों, व्यापार जगत, सरकारी व निजी संस्थानों और शिक्षा जगत पर पड़ रहा है।

त्योहारों की तिथियों में असमानता: मूल समस्या
सनातन परंपरा में पर्व-त्योहार चंद्र पंचांग पर आधारित हैं। भारत में कई प्रमुख संस्थान, जैसे वाराणसी, उज्जैन, नासिक, कांची आदि, अपने-अपने पंचांग प्रकाशित करते हैं। इन पंचांगों में कभी-कभी अमावस्या, पूर्णिमा या नक्षत्र की गणना में सूक्ष्म अंतर हो जाता है।

इसका परिणाम यह होता है कि:
किसी वर्ष होली, दशहरा, दीपावली, राखी जैसे प्रमुख त्योहार दो अलग-अलग तिथियों पर मनाए जाते हैं।
कहीं बैंक और सरकारी संस्थान एक दिन छुट्टी करते हैं तो कहीं शेयर बाजार, निजी कंपनियाँ और स्कूल अलग दिन बंद रहते हैं। कई बार तो राज्य एवं केंद्र सरकारों की भी छुट्टियाँ अलग अलग दिन होती हैं।
परिवार के सदस्य, जो अलग-अलग क्षेत्रों या उद्योगों में कार्यरत हैं, एक साथ त्योहार नहीं मना पाते।

उदाहरण स्वरूप, इस वर्ष 20 अक्टूबर को बैंकों की छुट्टी रहेगी, जबकि उसी दिन शेयर बाजार खुला रहेगा । अगले दिन यानी 21 अक्टूबर को बैंक खुले, पर शेयर बाजार बंद रहेगा। और 22 अक्टूबर को फिर से बैंक बंद रहेंगे | इस तरह की असंगत स्थिति में कोई भी परिवार एक साथ त्योहार की तैयारी और उत्सव नहीं मना सकता।

राष्ट्रीय स्तर पर सेंट्रलाइज्ड कैलेंडर की आवश्यकता
भारत जैसे विशाल और विविध देश में, एकीकृत और सेंट्रलाइज्ड राष्ट्रीय कैलेंडर की आवश्यकता अब समय की माँग है।

प्रस्ताव है कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय एक केंद्रीय पंचांग प्राधिकरण (Central Panchang Authority) का गठन करें, जो पूरे देश के लिए आगामी 10 वर्षों का पंचांग तैयार करे। कुछ वर्ष पहले ऐसा सुना गया था की प्रधानमंत्री की मोदी जी ने काशी संस्कृत विश्विद्यालय को ये जिम्मा सौंपा था, इसके परिणाम अपेक्षित हैं।

इस पहल के लाभ:
एकरूपता: पूरे देश में सभी त्योहार एक ही दिन मनाए जाएंगे।
प्रशासनिक सुविधा: बैंक, शेयर बाजार, निजी और सरकारी स्कूल, केंद्र एवं राज्य के सरकारी कार्यालय और निजी कंपनियाँ सभी के लिए एक समान छुट्टी का कैलेंडर होगा।
धार्मिक मतभेद का समाधान: अलग-अलग संस्थानों के बीच अनावश्यक विवाद समाप्त होंगे।
अंतरराष्ट्रीय मान्यता: विदेशी पर्यटक भी सही तिथियों के अनुसार अपनी यात्रा योजनाएँ बना सकेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही भारतीय संस्कृति और परंपरा को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने की दिशा में अनेक प्रयास कर चुके हैं। यह उनके “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के विचार को मजबूत करेगा।

वर्तमान छुट्टियों की व्यवस्था की खामियाँ
अभी की छुट्टियों की व्यवस्था में कई खामियाँ हैं, जो आम नागरिकों और उद्योगों को प्रभावित करती हैं।
बीच-बीच में छुट्टियाँ: जैसे इस बार 19 अक्टूबर रविवार, 20 – 21 अक्टूबर कहीं छुट्टी कहीं कार्य दिवस, 22 अक्टूबर छुट्टी — यह पैटर्न परिवारों के लिए असुविधाजनक है।
उत्पादकता पर असर: कंपनियों को बार-बार रुकावट का सामना करना पड़ता है, जिससे कार्य की निरंतरता प्रभावित होती है।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर असर: लोग लगातार छुट्टी न मिलने के कारण लंबी यात्रा नहीं कर पाते, जिससे पर्यटन उद्योग को नुकसान होता है।
स्कूल और माता-पिता की छुट्टियों में असंगति: जब बच्चों के स्कूल बंद हों और माता-पिता के कार्यस्थल खुले हों, तो परिवार एक साथ त्योहार का आनंद नहीं ले पाता।

सरकार को क्या करना चाहिए
सरकार इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठा सकती है।
नीचे कुछ प्रमुख सुझाव दिए जा रहे हैं:
राष्ट्रीय स्तर का पंचांग तैयार हो – यह पंचांग वैज्ञानिक और खगोलशास्त्रीय मानकों के आधार पर हो।
कंप्यूटराइज्ड कैलेंडर सिस्टम – त्योहारों की छुट्टियाँ और कार्य दिवस स्वचालित रूप से अपडेट हों।
लॉन्ग वीकेंड नीति – यदि किसी त्योहार की छुट्टी मंगलवार या गुरुवार को आती है, तो उसके आस-पास के शनिवार को कार्य दिवस घोषित कर निरंतर तीन दिन की छुट्टी बनाई जाए।
कानूनी प्रावधान – कैलेंडर को स्कूलों, बैंकों, सरकारी व निजी संस्थानों द्वारा पालन करना अनिवार्य हो।
अग्रिम सूचना – अगले वर्ष का त्योहार और छुट्टी कैलेंडर कम से कम 3 महीने पहले घोषित किया जाए।

लॉन्ग वीकेंड का आर्थिक महत्व
यदि सरकार लॉन्ग वीकेंड नीति लागू करती है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
पर्यटन को बढ़ावा:
जब लोगों को लगातार तीन-चार दिन की छुट्टी मिलेगी, तो वे यात्रा पर निकलेंगे।
इससे होटल, परिवहन, पर्यटन स्थलों और स्थानीय बाजारों की आय बढ़ेगी।

घरेलू खर्च में वृद्धि:
यात्रा से पहले लोग कपड़े, खाद्य सामग्री और अन्य वस्तुएँ खरीदते हैं।
त्योहार के दौरान शॉपिंग और खर्च बढ़ने से देश का पैसा देश में ही घूमेगा।

रोजगार सृजन:
पर्यटन उद्योग के विस्तार से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
इससे छोटे और मध्यम व्यवसाय भी लाभान्वित होंगे।

विदेशी निवेश और निजी क्षेत्र पर प्रभाव
एक और महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि भारत के कई निजी अस्पताल, बैंक और बड़े उद्योगों में विदेशी निवेश है।
जब अलग-अलग संस्थान अपनी सुविधा के अनुसार छुट्टियाँ घोषित करते हैं, तो यह विदेशी निवेशकों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा करता है।
यदि सेंट्रलाइज्ड छुट्टी कैलेंडर हो, तो:
विदेशी निवेशकों को अपनी व्यापारिक योजनाएँ बनाने में आसानी होगी।
वैश्विक कंपनियाँ भारतीय बाजार को अधिक व्यवस्थित और विश्वसनीय मानेंगी।
Ease of Doing Business रैंकिंग में सुधार होगा।

अंतरराष्ट्रीय उदाहरण
कई देशों ने यह समस्या पहले ही हल कर ली है।
चीन में त्योहारों का कैलेंडर सरकार द्वारा पहले ही घोषित कर दिया जाता है।
जापान और सिंगापुर में लॉन्ग वीकेंड पॉलिसी के कारण पर्यटन और घरेलू उद्योग को बहुत लाभ हुआ है।
भारत भी इन देशों के अनुभवों से सीख लेकर बेहतर नीति बना सकता है।

एक संगठित प्रयास की आवश्यकता
भारत की सांस्कृतिक विरासत और त्योहारों की विविधता हमारी पहचान है। परंतु यदि इन्हीं त्योहारों की तिथियों में असमानता और छुट्टियों के असंगठित प्रबंधन से नागरिकों, उद्योगों और पर्यटन को नुकसान हो रहा है, तो यह राष्ट्रीय हानि है।
केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर एकीकृत, वैज्ञानिक और सेंट्रलाइज्ड त्योहार व छुट्टी कैलेंडर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।

यदि यह प्रणाली लागू होती है, तो:
परिवारों को एक साथ त्योहार मनाने का अवसर मिलेगा।
उद्योगों को बेहतर कार्य योजना बनाने में सुविधा होगी।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलेगा।
और सबसे महत्वपूर्ण, यह “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की दिशा में एक सशक्त कदम होगा।

हमारा भारत सरकार को सुझाव है कि इस विषय को गंभीरता से लिया जाए और आने वाले वर्षों में अक्टूबर महीने तक पूरे अगले वर्ष का त्योहार और छुट्टी कैलेंडर घोषित किया जाए, जिससे नागरिक, उद्योग और शैक्षिक संस्थान सब अपनी योजनाएँ सुव्यवस्थित तरीके से बना सकें।

धन्यवाद,

रोटेरियन सुनील दत्त गोयल
महानिदेशक, इम्पीरियल चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
पूर्व उपाध्यक्ष, जयपुर स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड
जयपुर, राजस्थान
suneelduttgoyal@gmail.com

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