
<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>e-rikshaw | Rtn. Suneel Dutt Goyal</title>
	<atom:link href="https://www.suneelduttgoyal.com/tag/e-rikshaw/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.suneelduttgoyal.com/tag/e-rikshaw/</link>
	<description>Entrepreneur, Agropreneur &#38; Thought Leader</description>
	<lastBuildDate>Tue, 07 Jan 2025 08:51:51 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	

<image>
	<url>https://www.suneelduttgoyal.com/wp-content/uploads/2024/12/SDG-Fevicon-150x150.png</url>
	<title>e-rikshaw | Rtn. Suneel Dutt Goyal</title>
	<link>https://www.suneelduttgoyal.com/tag/e-rikshaw/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>साइबर अपराधों का बढ़ता कहर: बैंक कर्मियों , सिम विक्रेताओं और ई-मित्र केंद्रों की मिलीभगत ने जनता को लूटा &#8211; पुलिस परेशान।</title>
		<link>https://www.suneelduttgoyal.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b9/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Suneel Dutt Goyal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Nov 2024 11:05:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Blog]]></category>
		<category><![CDATA[cyber crime]]></category>
		<category><![CDATA[e-rikshaw]]></category>
		<category><![CDATA[Rashtradoot]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.suneelduttgoyal.com/?p=335</guid>

					<description><![CDATA[<p>डिजिटल इंडिया के सपने के साथ देश तेजी से तकनीकी प्रगति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इस प्रगति की आड़ में साइबर अपराधों का खतरा भी गंभीर रूप से बढ़ गया है। बैंक कर्मियों , सिम कार्ड विक्रेताओं और ई-मित्र केंद्रों की मिलीभगत ने इस समस्या को और बढ़ावा दिया है। मेहनतकश नागरिकों की कमाई पर साइबर अपराधियों का निशाना अब एक विकराल समस्या बन गई है। इस मिलीभगत से जनता का विश्वास टूट रहा है और अपराधियों को लूट-खसोट का खुला मैदान मिल रहा है। बैंकों की कमजोर प्रणालीबैंक, जो जनता के धन और विश्वास की नींव पर खड़े होते हैं, अब खुद धोखाधड़ी के मामलों में सवालों के घेरे में हैं। कई बैंकों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खाते खोल दिए जाते हैं। केवाईसी (KYC) प्रक्रिया, जो सुरक्षा का मुख्य आधार है, अक्सर महज औपचारिकता बनकर रह जाती है। इसके कारण अपराधी फर्जी खातों का उपयोग कर लेन-देन को अंजाम देते हैं।  इसके अलावा, संदिग्ध लेन-देन की अनदेखी बैंकिंग प्रणाली की सबसे बड़ी खामी है। आरबीआई के नियमों के अनुसार, ₹50,000 से अधिक की नकद जमा या निकासी होने पर तुरंत उस खाते की जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा, महीने में ₹1,00,000 से अधिक एवं 1 वर्ष में 10 लख रुपए तक का ही ट्रांजैक्शन आरबीआई के द्वारा अधिकृत है इससे ज्यादा का ट्रांजैक्शन होने पर  खाताधारक से संपर्क किया जाना चाहिए और ट्रांजैक्शन की सत्यता की पुष्टि की जानी चाहिए। बैंक कर्मियों द्वारा POS मशीन किसी को जारी करने पर यह सुनिश्चित करना चाहिए की आवेदक के व्यापार  के लिए  सही में इसकी आवश्यकता है भी या नहीं। जहाँ भी POS मशीन जारी की जाती है वहां की वीडियो KYC रिकॉर्ड की जानी चाहिए जिसमें बैंक कर्मी के साथ व्यापारी के साथ लाइव लोकेशन पर रिकॉर्डिंग होनी चाहिए। आरबीआई को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी असाधारण  अमाउंट के खाते में जमा होने पर उसे तुरंत होल्ड पर रख दिया जाना चाहिए और खाताधारक से संपर्क करके यह मालूम करें कि यह पैसा उसके पास कहां से आया वह उसका स्रोत बताएं अन्यथा वह पूरी सूचना आयकर विभाग को तुरंत सूचित कर दें और पुलिस को सूचना कर दें क्योंकि एक सामान्य  बचत खाते में इस तरह का बड़ा अमाउंट अगर आता है तो अपने आप ही शक के घेरे में आ जाता है और बैंक वालों के लिए यह मालूम करना बड़ा आसान काम है कि अमाउंट किसका आया और कहां से है यह दोनों उनको मालूम पड़ जाता है और यह अमाउंट अगर 3-4  दिन के लिए भी होल्ड कर दिया जाए तो जिसके  साथ भी धोखाधड़ी  हुई  है उसकी सूचना पुलिस व  बैंक तक पहुंच भी जाएगी और वह पैसा बैंक के खाते में ही जमा रह जाएगा ।  सिम कार्ड विक्रेताओं का गैर-जिम्मेदार रवैयाटेलीकॉम सेक्टर में भी गहरी मिलीभगत देखने को मिल रही है। सिम कार्ड वितरकों द्वारा बिना उचित दस्तावेज़ सत्यापन के सिम जारी करना एक आम बात हो गई है। फर्जी पहचान पत्रों के सहारे जारी किए गए सिम कार्डों का इस्तेमाल अपराधी जनता को ठगने और गुमनाम रहने के लिए करते हैं। कई बार एक ही व्यक्ति के नाम पर 10-15 सिम कार्ड तक जारी कर दिए जाते हैं, जबकि नियमानुसार अधिकतम 9 सिम कार्ड जारी किए जा सकते हैं। टेलीकॉम कंपनियों की इस मिलीभगतसे सिम कार्डों का दुरुपयोग बढ़ गया है। ई-मित्र केंद्र: धोखाधड़ी का नया अड्डाजहां एक ओर ई-मित्र केंद्रों को सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने का माध्यम माना जाता है, वहीं ये केंद्र अब साइबर अपराधों का नया अड्डा बनते जा रहे हैं। ई-मित्र केंद्रों पर ग्राहकों की जानकारी बिना उचित सत्यापन के दर्ज की जाती है, जिससे उनकी गोपनीय जानकारी अपराधियों तक पहुंच जाती है। कई ई-मित्र केंद्रों पर फर्जी खातों को खोलने और सिम कार्ड वितरित करने में मिलीभगत के आरोप भी लग चुके हैं। यह स्थिति न केवल जनता की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि डिजिटल सेवाओं पर से भरोसा भी कम करती है। ई-मित्र केंद्रों पर काम कर रहे कर्मचारियों की भी पुलिस वेरिफिकेशन द्वारा गहन जांच करने की आवश्यकता है यदि कोई कर्मचारी इस तरह की संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है तो उसे राष्ट्रदोह की श्रेणी का अपराध मानते हुए  आजीवन इस तरह के कार्य करने के लिए बैन कर देना चाहिए। संस्थानों की मिलीभगत से अपराधियों को बढ़ावाबैंक कर्मियों , सिम विक्रेताओं और ई-मित्र की मिलीभगत  ने साइबर अपराधियों को एक सुनहरा मौका दिया है। ये अपराधी जनता की मेहनत की कमाई को ठगकर उसे देश विरोधी गतिविधियों में लगा रहे हैं। हाल के मामलों में देखा गया है कि कैसे फर्जी खातों और सिम कार्डों का उपयोग आतंकी फंडिंग और अन्य अपराधों में किया गया। क्या है समाधान?इस बढ़ते खतरे को रोकने के लिए सरकार और संबंधित संस्थाओं को तुरंत कदम उठाने होंगे। बैंकों को अपनी केवाईसी प्रणाली को सख्त बनाना होगा। बड़े लेन-देन पर रियल-टाइम निगरानी सुनिश्चित करनी होगी। बैंक कर्मचारियों की जवाबदेही तय करनी होगी ताकि वे धोखाधड़ी के मामलों में शामिल न हों। सिम कार्ड वितरण के लिए टेलीकॉम कंपनियों को सख्त नियम लागू करने होंगे। फर्जी दस्तावेजों पर सिम जारी करने वाले विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द किए जाने चाहिए। ई-मित्र केंद्रों की नियमित जांच और निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए। इन केंद्रों द्वारा की गई किसी भी मिलीभगतपर भारी जुर्माना लगाना चाहिए और लाइसेंस रद्द करना चाहिए। साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं ने देश में डिजिटल सुरक्षा की गंभीरता को उजागर किया है। बैंक कर्मियों, सिम विक्रेताओं और ई-मित्र केंद्रों के कर्मचारियों की मिलीभगत से ना  केवल जनता की संपत्ति छीन रही है, बल्कि देश की सुरक्षा को भी खतरे में डाल रही है। यदि समय रहते इन संस्थानों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता का विश्वास और देश की अर्थव्यवस्था दोनों को भारी नुकसान हो सकता है। धन्यवाद, सुनील दत्त गोयलमहानिदेशकइम्पीरियल चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीजयपुर, राजस्थान suneelduttgoyal@gmail.com</p>
<p>The post <a href="https://www.suneelduttgoyal.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b9/">साइबर अपराधों का बढ़ता कहर: बैंक कर्मियों , सिम विक्रेताओं और ई-मित्र केंद्रों की मिलीभगत ने जनता को लूटा &#8211; पुलिस परेशान।</a> appeared first on <a href="https://www.suneelduttgoyal.com">Rtn. Suneel Dutt Goyal</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>डिजिटल इंडिया के सपने के साथ देश तेजी से तकनीकी प्रगति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इस प्रगति की आड़ में साइबर अपराधों का खतरा भी गंभीर रूप से बढ़ गया है। बैंक कर्मियों , सिम कार्ड विक्रेताओं और ई-मित्र केंद्रों की मिलीभगत ने इस समस्या को और बढ़ावा दिया है। मेहनतकश नागरिकों की कमाई पर साइबर अपराधियों का निशाना अब एक विकराल समस्या बन गई है। इस मिलीभगत से जनता का विश्वास टूट रहा है और अपराधियों को लूट-खसोट का खुला मैदान मिल रहा है।</p>



<p><strong>बैंकों की कमजोर प्रणाली</strong><br />बैंक, जो जनता के धन और विश्वास की नींव पर खड़े होते हैं, अब खुद धोखाधड़ी के मामलों में सवालों के घेरे में हैं। कई बैंकों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खाते खोल दिए जाते हैं। केवाईसी (KYC) प्रक्रिया, जो सुरक्षा का मुख्य आधार है, अक्सर महज औपचारिकता बनकर रह जाती है। इसके कारण अपराधी फर्जी खातों का उपयोग कर लेन-देन को अंजाम देते हैं। </p>



<p>इसके अलावा, संदिग्ध लेन-देन की अनदेखी बैंकिंग प्रणाली की सबसे बड़ी खामी है। आरबीआई के नियमों के अनुसार, ₹50,000 से अधिक की नकद जमा या निकासी होने पर तुरंत उस खाते की जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा, महीने में ₹1,00,000 से अधिक एवं 1 वर्ष में 10 लख रुपए तक का ही ट्रांजैक्शन आरबीआई के द्वारा अधिकृत है इससे ज्यादा का ट्रांजैक्शन होने पर  खाताधारक से संपर्क किया जाना चाहिए और ट्रांजैक्शन की सत्यता की पुष्टि की जानी चाहिए। बैंक कर्मियों द्वारा POS मशीन किसी को जारी करने पर यह सुनिश्चित करना चाहिए की आवेदक के व्यापार  के लिए  सही में इसकी आवश्यकता है भी या नहीं। जहाँ भी POS मशीन जारी की जाती है वहां की वीडियो KYC रिकॉर्ड की जानी चाहिए जिसमें बैंक कर्मी के साथ व्यापारी के साथ लाइव लोकेशन पर रिकॉर्डिंग होनी चाहिए।</p>



<p>आरबीआई को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी असाधारण  अमाउंट के खाते में जमा होने पर उसे तुरंत होल्ड पर रख दिया जाना चाहिए और खाताधारक से संपर्क करके यह मालूम करें कि यह पैसा उसके पास कहां से आया वह उसका स्रोत बताएं अन्यथा वह पूरी सूचना आयकर विभाग को तुरंत सूचित कर दें और पुलिस को सूचना कर दें क्योंकि एक सामान्य  बचत खाते में इस तरह का बड़ा अमाउंट अगर आता है तो अपने आप ही शक के घेरे में आ जाता है और बैंक वालों के लिए यह मालूम करना बड़ा आसान काम है कि अमाउंट किसका आया और कहां से है यह दोनों उनको मालूम पड़ जाता है और यह अमाउंट अगर 3-4  दिन के लिए भी होल्ड कर दिया जाए तो जिसके  साथ भी धोखाधड़ी  हुई  है उसकी सूचना पुलिस व  बैंक तक पहुंच भी जाएगी और वह पैसा बैंक के खाते में ही जमा रह जाएगा । </p>



<p><strong>सिम कार्ड विक्रेताओं का गैर-जिम्मेदार रवैया</strong><br />टेलीकॉम सेक्टर में भी गहरी मिलीभगत देखने को मिल रही है। सिम कार्ड वितरकों द्वारा बिना उचित दस्तावेज़ सत्यापन के सिम जारी करना एक आम बात हो गई है। फर्जी पहचान पत्रों के सहारे जारी किए गए सिम कार्डों का इस्तेमाल अपराधी जनता को ठगने और गुमनाम रहने के लिए करते हैं।</p>



<p>कई बार एक ही व्यक्ति के नाम पर 10-15 सिम कार्ड तक जारी कर दिए जाते हैं, जबकि नियमानुसार अधिकतम 9 सिम कार्ड जारी किए जा सकते हैं। टेलीकॉम कंपनियों की इस मिलीभगतसे सिम कार्डों का दुरुपयोग बढ़ गया है।</p>



<p><strong>ई-मित्र केंद्र: धोखाधड़ी का नया अड्डा</strong><br />जहां एक ओर ई-मित्र केंद्रों को सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने का माध्यम माना जाता है, वहीं ये केंद्र अब साइबर अपराधों का नया अड्डा बनते जा रहे हैं। ई-मित्र केंद्रों पर ग्राहकों की जानकारी बिना उचित सत्यापन के दर्ज की जाती है, जिससे उनकी गोपनीय जानकारी अपराधियों तक पहुंच जाती है। कई ई-मित्र केंद्रों पर फर्जी खातों को खोलने और सिम कार्ड वितरित करने में मिलीभगत के आरोप भी लग चुके हैं। यह स्थिति न केवल जनता की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि डिजिटल सेवाओं पर से भरोसा भी कम करती है।</p>



<p><strong>ई-मित्र केंद्रों पर काम कर रहे कर्मचारियों की भी पुलिस वेरिफिकेशन द्वारा गहन जांच करने की आवश्यकता है यदि कोई कर्मचारी इस तरह की संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है तो उसे राष्ट्रदोह की श्रेणी का अपराध मानते हुए  आजीवन इस तरह के कार्य करने के लिए बैन कर देना चाहिए।</strong></p>



<p><strong>संस्थानों की मिलीभगत से अपराधियों को बढ़ावा</strong><br />बैंक कर्मियों , सिम विक्रेताओं और ई-मित्र की मिलीभगत  ने साइबर अपराधियों को एक सुनहरा मौका दिया है। ये अपराधी जनता की मेहनत की कमाई को ठगकर उसे देश विरोधी गतिविधियों में लगा रहे हैं। हाल के मामलों में देखा गया है कि कैसे फर्जी खातों और सिम कार्डों का उपयोग आतंकी फंडिंग और अन्य अपराधों में किया गया।</p>



<p><strong>क्या है समाधान?</strong><br />इस बढ़ते खतरे को रोकने के लिए सरकार और संबंधित संस्थाओं को तुरंत कदम उठाने होंगे। बैंकों को अपनी केवाईसी प्रणाली को सख्त बनाना होगा। बड़े लेन-देन पर रियल-टाइम निगरानी सुनिश्चित करनी होगी। बैंक कर्मचारियों की जवाबदेही तय करनी होगी ताकि वे धोखाधड़ी के मामलों में शामिल न हों।</p>



<p>सिम कार्ड वितरण के लिए टेलीकॉम कंपनियों को सख्त नियम लागू करने होंगे। फर्जी दस्तावेजों पर सिम जारी करने वाले विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द किए जाने चाहिए।</p>



<p>ई-मित्र केंद्रों की नियमित जांच और निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए। इन केंद्रों द्वारा की गई किसी भी मिलीभगतपर भारी जुर्माना लगाना चाहिए और लाइसेंस रद्द करना चाहिए।</p>



<p><br />साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं ने देश में डिजिटल सुरक्षा की गंभीरता को उजागर किया है। बैंक कर्मियों, सिम विक्रेताओं और ई-मित्र केंद्रों के कर्मचारियों की मिलीभगत से ना  केवल जनता की संपत्ति छीन रही है, बल्कि देश की सुरक्षा को भी खतरे में डाल रही है। यदि समय रहते इन संस्थानों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता का विश्वास और देश की अर्थव्यवस्था दोनों को भारी नुकसान हो सकता है।</p>



<p>धन्यवाद,</p>



<p>सुनील दत्त गोयल<br />महानिदेशक<br />इम्पीरियल चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री<br />जयपुर, राजस्थान</p>



<p>suneelduttgoyal@gmail.com</p>



<figure class="wp-block-embed">
<div class="wp-block-embed__wrapper">https://epaper.rashtradoot.com/search/1/2024-11-21/2</div>
</figure>
<p>The post <a href="https://www.suneelduttgoyal.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b9/">साइबर अपराधों का बढ़ता कहर: बैंक कर्मियों , सिम विक्रेताओं और ई-मित्र केंद्रों की मिलीभगत ने जनता को लूटा &#8211; पुलिस परेशान।</a> appeared first on <a href="https://www.suneelduttgoyal.com">Rtn. Suneel Dutt Goyal</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ई-रिक्शा मालिक ही बनें चालक : सूदखोर माफियाओं पर कब लगेगी लगाम ?</title>
		<link>https://www.suneelduttgoyal.com/%e0%a4%88-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Suneel Dutt Goyal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 Nov 2024 13:03:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Blog]]></category>
		<category><![CDATA[e-rikshaw]]></category>
		<category><![CDATA[Rashtradoot]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.suneelduttgoyal.com/?p=332</guid>

					<description><![CDATA[<p>हाल ही में सरकार ने ई-रिक्शा चालकों के हित में कलर कोडिंग, QR कोड, और एक व्यक्ति को केवल एक ई-रिक्शा प्रदान करने जैसे कदम उठाए हैं। ये उपाय स्वागत योग्य हैं, लेकिन इनसे समस्या का सम्पूर्ण समाधान नहीं हुआ है। ई-रिक्शा रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को और पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए, सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन में असली मालिक का ड्राइविंग लाइसेंस लिंक हो। इसका लाभ यह होगा कि ट्रैफिक पुलिस या अन्य संबंधित अधिकारी यह आसानी से जाँच कर सकेंगे कि जिस व्यक्ति के नाम पर ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन हुआ है, वही व्यक्ति वास्तव में उसे चला रहा है या नहीं। इससे फर्जी मालिकाना हक और सूदखोर एवं माफियाओं द्वारा किराए पर चलाए जा रहे ई-रिक्शाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा, जो इस समय एक बड़ी समस्या बन चुकी है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक ई-रिक्शा चालक के लिए यह अनिवार्य किया जाना चाहिए कि वह अपना पहचान पत्र गले में पहने। पहचान पत्र के माध्यम से उनकी पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी, और यातायात व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी। यह उपाय ट्रैफिक पुलिस और अन्य अधिकारियों को आवश्यक जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने में सहायक होगा, जिससे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति द्वारा ई-रिक्शा चलाने की घटनाओं पर अंकुश लगेगा। यह आवश्यक है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि जो लोग ई-रिक्शा का पंजीकरण करवाते हैं, वे स्वयं ही उसे चलाएँ। कई सूदखोर माफियाओं ने एक ही नाम और पते से दर्जनों ई-रिक्शा खरीद रखे हैं और इसे एक मुनाफे वाले व्यापार मॉडल में बदल दिया है। सरकार को इस समस्या का समाधान करने के लिए सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके लिए, जिला परिवहन अधिकारी (डीटीओ) को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वे इस प्रकार के ई-रिक्शा के पंजीकरण की स्कैनिंग करें। यदि किसी एक व्यक्ति या पते पर असामान्य संख्या में ई-रिक्शा पंजीकृत पाए जाते हैं, तो उनका पंजीकरण रद्द किया जाना चाहिए। इस प्रकार के कदम उठाकर, न केवल सूदखोरी पर अंकुश लगाया जा सकेगा, बल्कि जरूरतमंद नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जा सकेंगे। इस प्रथा के चलते, एक ही व्यक्ति कई ई-रिक्शा खरीदकर उन्हें किराए पर चला रहा है, जिससे गरीब और बेरोजगार लोग, जिनके पास ई-रिक्शा खरीदने के साधन नहीं हैं, मजबूरन प्रतिदिन 200 से 500 रुपये का किराया देकर इन्हें चलाते हैं। इससे न केवल चालकों का आर्थिक शोषण हो रहा है, बल्कि ट्रैफिक और अन्य मुद्दे भी उत्पन्न हो रहे हैं। सरकार को चाहिए कि ई-रिक्शा पंजीकरण और संचालन के लिए सख्त नियम बनाए, जिससे वास्तविक जरूरतमंद लोगों को ही इस कार्य का लाभ मिल सके। समस्याओं के समाधान हेतु सुझाव 1. सूदखोर माफियाओं पर रोक और कानूनी कार्यवाही सरकार को ऐसे सूदखोर माफियाओं की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। इन लोगों को आर्थिक अपराधी घोषित कर उचित दंड दिए जाने चाहिए ताकि वे ई-रिक्शा चालकों का शोषण न कर सकें। 2. ई-रिक्शा चालकों के लिए सस्ते / कम ब्याज दर पर ऋण योजना सरकार को ऐसे ई-रिक्शा चालकों की पहचान करनी चाहिए, जो केवल आजीविका के लिए इसे चला रहे हैं। इनके लिए बिना किसी प्रारंभिक भुगतान के और सस्ते / कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है ताकि वे अपने ई-रिक्शा का स्वामित्व आसानी से प्राप्त कर सकें। 3. सामाजिक संगठनों की भागीदारी सामाजिक संगठनों को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। वे आर्थिक रूप से कमजोर चालकों की सहायता कर सकते हैं और उनके लिए फंडिंग या ई-रिक्शा स्वामित्व योजनाएँ संचालित कर सकते हैं। इससे माफियाओं पर निर्भरता कम होगी और चालक आर्थिक रूप से सशक्त होंगे। 4. चार्जिंग और पार्किंग सुविधाओं का विकास ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या को देखते हुए, सरकार को अधिक से अधिक चार्जिंग स्टेशन और पार्किंग स्थल विकसित करने चाहिए। ये सुविधाएँ आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए, जिससे चालकों को अनावश्यक खर्च से बचाया जा सके। इन सभी उपायों को लागू कर हम न केवल ई-रिक्शा चालकों की स्थिति में सुधार ला सकते हैं, बल्कि सूदखोर माफियाओं के नियंत्रण में भी सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही, ये कदम एक स्वच्छ और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था का निर्माण करने में भी सहायक सिद्ध होंगे। धन्यवाद। सुनील दत्त गोयल महानिदेशक इम्पीरियल चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री जयपुर, राजस्थान suneelduttgoyal@gmail.com</p>
<p>The post <a href="https://www.suneelduttgoyal.com/%e0%a4%88-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b2/">ई-रिक्शा मालिक ही बनें चालक : सूदखोर माफियाओं पर कब लगेगी लगाम ?</a> appeared first on <a href="https://www.suneelduttgoyal.com">Rtn. Suneel Dutt Goyal</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>हाल ही में सरकार ने ई-रिक्शा चालकों के हित में कलर कोडिंग, QR कोड, और एक व्यक्ति को केवल एक ई-रिक्शा प्रदान करने जैसे कदम उठाए हैं। ये उपाय स्वागत योग्य हैं, लेकिन इनसे समस्या का सम्पूर्ण समाधान नहीं हुआ है।</p>



<p>ई-रिक्शा रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को और पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए, सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन में असली मालिक का ड्राइविंग लाइसेंस लिंक हो। इसका लाभ यह होगा कि <a></a>ट्रैफिक पुलिस या अन्य संबंधित अधिकारी यह आसानी से जाँच कर सकेंगे कि जिस व्यक्ति के नाम पर ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन हुआ है, वही व्यक्ति वास्तव में उसे चला रहा है या नहीं। इससे फर्जी मालिकाना हक और सूदखोर एवं माफियाओं द्वारा किराए पर चलाए जा रहे ई-रिक्शाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा, जो इस समय एक बड़ी समस्या बन चुकी है।</p>



<p>इसके अतिरिक्त, प्रत्येक ई-रिक्शा चालक के लिए यह अनिवार्य किया जाना चाहिए कि वह अपना पहचान पत्र गले में पहने। पहचान पत्र के माध्यम से उनकी पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी, और यातायात व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी। यह उपाय ट्रैफिक पुलिस और अन्य अधिकारियों को आवश्यक जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने में सहायक होगा, जिससे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति द्वारा ई-रिक्शा चलाने की घटनाओं पर अंकुश लगेगा।</p>



<p>यह आवश्यक है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि जो लोग ई-रिक्शा का पंजीकरण करवाते हैं, वे स्वयं ही उसे चलाएँ। कई सूदखोर माफियाओं ने एक ही नाम और पते से दर्जनों ई-रिक्शा खरीद रखे हैं और इसे एक मुनाफे वाले व्यापार मॉडल में बदल दिया है।</p>



<p>सरकार को इस समस्या का समाधान करने के लिए सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके लिए, जिला परिवहन अधिकारी (डीटीओ) को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वे इस प्रकार के ई-रिक्शा के पंजीकरण की स्कैनिंग करें। यदि किसी एक व्यक्ति या पते पर असामान्य संख्या में ई-रिक्शा पंजीकृत पाए जाते हैं, तो उनका पंजीकरण रद्द किया जाना चाहिए। इस प्रकार के कदम उठाकर, न केवल सूदखोरी पर अंकुश लगाया जा सकेगा, बल्कि जरूरतमंद नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जा सकेंगे।</p>



<p>इस प्रथा के चलते, एक ही व्यक्ति कई ई-रिक्शा खरीदकर उन्हें किराए पर चला रहा है, जिससे गरीब और बेरोजगार लोग, जिनके पास ई-रिक्शा खरीदने के साधन नहीं हैं, मजबूरन प्रतिदिन 200 से 500 रुपये का किराया देकर इन्हें चलाते हैं।</p>



<p>इससे न केवल चालकों का आर्थिक शोषण हो रहा है, बल्कि ट्रैफिक और अन्य मुद्दे भी उत्पन्न हो रहे हैं। सरकार को चाहिए कि ई-रिक्शा पंजीकरण और संचालन के लिए सख्त नियम बनाए, जिससे वास्तविक जरूरतमंद लोगों को ही इस कार्य का लाभ मिल सके।</p>



<p>समस्याओं के समाधान हेतु सुझाव</p>



<p>1. सूदखोर माफियाओं पर रोक और कानूनी कार्यवाही</p>



<p>सरकार को ऐसे सूदखोर माफियाओं की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। इन लोगों को आर्थिक अपराधी घोषित कर उचित दंड दिए जाने चाहिए ताकि वे ई-रिक्शा चालकों का शोषण न कर सकें।</p>



<p>2. ई-रिक्शा चालकों के लिए सस्ते / कम ब्याज दर पर ऋण योजना</p>



<p>सरकार को ऐसे ई-रिक्शा चालकों की पहचान करनी चाहिए, जो केवल आजीविका के लिए इसे चला रहे हैं। इनके लिए बिना किसी प्रारंभिक भुगतान के और सस्ते / कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है ताकि वे अपने ई-रिक्शा का स्वामित्व आसानी से प्राप्त कर सकें।</p>



<p>3. सामाजिक संगठनों की भागीदारी</p>



<p>सामाजिक संगठनों को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। वे आर्थिक रूप से कमजोर चालकों की सहायता कर सकते हैं और उनके लिए फंडिंग या ई-रिक्शा स्वामित्व योजनाएँ संचालित कर सकते हैं। इससे माफियाओं पर निर्भरता कम होगी और चालक आर्थिक रूप से सशक्त होंगे।</p>



<p>4. चार्जिंग और पार्किंग सुविधाओं का विकास</p>



<p>ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या को देखते हुए, सरकार को अधिक से अधिक चार्जिंग स्टेशन और पार्किंग स्थल विकसित करने चाहिए। ये सुविधाएँ आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए, जिससे चालकों को अनावश्यक खर्च से बचाया जा सके।</p>



<p>इन सभी उपायों को लागू कर हम न केवल ई-रिक्शा चालकों की स्थिति में सुधार ला सकते हैं, बल्कि सूदखोर माफियाओं के नियंत्रण में भी सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही, ये कदम एक स्वच्छ और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था का निर्माण करने में भी सहायक सिद्ध होंगे।</p>



<p>धन्यवाद।</p>



<p>सुनील दत्त गोयल</p>



<p>महानिदेशक</p>



<p>इम्पीरियल चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री</p>



<p>जयपुर, राजस्थान</p>



<p>suneelduttgoyal@gmail.com</p>



<figure class="wp-block-embed"><div class="wp-block-embed__wrapper">
https://epaper.rashtradoot.com/search/1/2024-11-15/2
</div></figure>
<p>The post <a href="https://www.suneelduttgoyal.com/%e0%a4%88-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b2/">ई-रिक्शा मालिक ही बनें चालक : सूदखोर माफियाओं पर कब लगेगी लगाम ?</a> appeared first on <a href="https://www.suneelduttgoyal.com">Rtn. Suneel Dutt Goyal</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ई-रिक्शा: रोजगार का साधन या व्यापार का जरिया?</title>
		<link>https://www.suneelduttgoyal.com/e-rikshaw-employment/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Suneel Dutt Goyal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Oct 2024 04:34:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Blog]]></category>
		<category><![CDATA[e-rikshaw]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.suneelduttgoyal.com/?p=233</guid>

					<description><![CDATA[<p>भारत और विशेष रूप से राजस्थान में, ई-रिक्शा चालकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। यह एक ओर आम नागरिकों के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण साधन बनता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे व्यावसायिक मुनाफे के लिए उपयोग कर रहे हैं। इस प्रथा में, बड़ी संख्या में ई-रिक्शा खरीदे जाते हैं और इन्हें किराए पर चलाने के लिए उपलब्ध कराया जाता है। ई-रिक्शा खरीदने और उन्हें किराए पर चलाने की इस प्रथा ने एक नया व्यापार मॉडल तैयार कर दिया है। सामान्यतः, एक व्यक्ति 10, 15, 20, या 50 तक ई-रिक्शा खरीद लेता है और उन्हें बड़े पैमाने पर किराए पर देता है। गरीब और बेरोजगार व्यक्ति, जिनके पास खुद का ई-रिक्शा खरीदने के लिए पैसे नहीं होते, वे इन्हें 200 से 500 रुपये प्रतिदिन के किराए पर लेते हैं। हालांकि, इस प्रथा में कई समस्याएं उभरकर सामने आई हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह व्यापार मॉडल रोजगार की तुलना में व्यावसायिक मुनाफे पर अधिक केंद्रित है। इसे सूदखोरी का एक नया रूप माना जा सकता है, जिसमें उच्च किराए के चलते गरीब चालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। इसके अलावा, एक ही व्यक्ति या कंपनी द्वारा बड़ी संख्या में ई-रिक्शा का स्वामित्व शहरों में ट्रैफिक जाम का प्रमुख कारण बन रहा है। अधिक रिक्शाओं के चलते सड़कों पर भीड़ बढ़ रही है, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ई-रिक्शाओं की अधिकता से सड़कों पर यातायात की गति धीमी हो जाती है, विशेषकर व्यस्त बाजारों और शहरी क्षेत्रों में। इस स्थिति ने पैदल यात्रियों और अन्य वाहनों के लिए भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में, ई-रिक्शाओं की लंबी कतारें ट्रैफिक जाम की स्थिति उत्पन्न करती हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। सरकार को इस समस्या का समाधान करने के लिए सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके लिए, जिला परिवहन अधिकारी (डीटीओ) को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वे इस प्रकार के ई-रिक्शा के पंजीकरण की स्कैनिंग करें। यदि किसी एक व्यक्ति या पते पर असामान्य संख्या में ई-रिक्शा पंजीकृत पाए जाते हैं, तो उनका पंजीकरण रद्द किया जाना चाहिए। इस प्रकार के कदम उठाकर, न केवल सूदखोरी पर अंकुश लगाया जा सकेगा, बल्कि जरूरतमंद नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जा सकेंगे। इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए, ई-रिक्शाओं के लिए विशेष लेन बनाने या समय सीमा तय करने जैसे उपाय भी अपनाए जा सकते हैं। इस तरह की नीतियों से न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या का समाधान होगा, बल्कि यह क्षेत्र एक स्वस्थ और स्थायी रोजगार का स्रोत भी बन सकेगा। सरकार और स्थानीय प्रशासन को मिलकर इस दिशा में काम करना चाहिए ताकि ई-रिक्शा चालक समुदाय की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके और यातायात व्यवस्था भी सुचारू रहे। धन्यवाद,सुनील दत्त गोयलमहानिदेशकइम्पीरियल चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीजयपुर, राजस्थानsuneelduttgoyal@gmail.com</p>
<p>The post <a href="https://www.suneelduttgoyal.com/e-rikshaw-employment/">ई-रिक्शा: रोजगार का साधन या व्यापार का जरिया?</a> appeared first on <a href="https://www.suneelduttgoyal.com">Rtn. Suneel Dutt Goyal</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>भारत और विशेष रूप से राजस्थान में, ई-रिक्शा चालकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। यह एक ओर आम नागरिकों के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण साधन बनता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे व्यावसायिक मुनाफे के लिए उपयोग कर रहे हैं। इस प्रथा में, बड़ी संख्या में ई-रिक्शा खरीदे जाते हैं और इन्हें किराए पर चलाने के लिए उपलब्ध कराया जाता है।</p>



<p>ई-रिक्शा खरीदने और उन्हें किराए पर चलाने की इस प्रथा ने एक नया व्यापार मॉडल तैयार कर दिया है। सामान्यतः, एक व्यक्ति 10, 15, 20, या 50 तक ई-रिक्शा खरीद लेता है और उन्हें बड़े पैमाने पर किराए पर देता है। गरीब और बेरोजगार व्यक्ति, जिनके पास खुद का ई-रिक्शा खरीदने के लिए पैसे नहीं होते, वे इन्हें 200 से 500 रुपये प्रतिदिन के किराए पर लेते हैं।</p>



<p>हालांकि, इस प्रथा में कई समस्याएं उभरकर सामने आई हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह व्यापार मॉडल रोजगार की तुलना में व्यावसायिक मुनाफे पर अधिक केंद्रित है। इसे सूदखोरी का एक नया रूप माना जा सकता है, जिसमें उच्च किराए के चलते गरीब चालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। इसके अलावा, एक ही व्यक्ति या कंपनी द्वारा बड़ी संख्या में ई-रिक्शा का स्वामित्व शहरों में ट्रैफिक जाम का प्रमुख कारण बन रहा है। अधिक रिक्शाओं के चलते सड़कों पर भीड़ बढ़ रही है, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है।</p>



<p>ई-रिक्शाओं की अधिकता से सड़कों पर यातायात की गति धीमी हो जाती है, विशेषकर व्यस्त बाजारों और शहरी क्षेत्रों में। इस स्थिति ने पैदल यात्रियों और अन्य वाहनों के लिए भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में, ई-रिक्शाओं की लंबी कतारें ट्रैफिक जाम की स्थिति उत्पन्न करती हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।</p>



<p>सरकार को इस समस्या का समाधान करने के लिए सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके लिए, जिला परिवहन अधिकारी (डीटीओ) को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वे इस प्रकार के ई-रिक्शा के पंजीकरण की स्कैनिंग करें। यदि किसी एक व्यक्ति या पते पर असामान्य संख्या में ई-रिक्शा पंजीकृत पाए जाते हैं, तो उनका पंजीकरण रद्द किया जाना चाहिए। इस प्रकार के कदम उठाकर, न केवल सूदखोरी पर अंकुश लगाया जा सकेगा, बल्कि जरूरतमंद नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जा सकेंगे।</p>



<p>इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए, ई-रिक्शाओं के लिए विशेष लेन बनाने या समय सीमा तय करने जैसे उपाय भी अपनाए जा सकते हैं। इस तरह की नीतियों से न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या का समाधान होगा, बल्कि यह क्षेत्र एक स्वस्थ और स्थायी रोजगार का स्रोत भी बन सकेगा। सरकार और स्थानीय प्रशासन को मिलकर इस दिशा में काम करना चाहिए ताकि ई-रिक्शा चालक समुदाय की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके और यातायात व्यवस्था भी सुचारू रहे।</p>



<p>धन्यवाद,<br>सुनील दत्त गोयल<br>महानिदेशक<br>इम्पीरियल चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री<br>जयपुर, राजस्थान<br>suneelduttgoyal@gmail.com</p>
<p>The post <a href="https://www.suneelduttgoyal.com/e-rikshaw-employment/">ई-रिक्शा: रोजगार का साधन या व्यापार का जरिया?</a> appeared first on <a href="https://www.suneelduttgoyal.com">Rtn. Suneel Dutt Goyal</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
